The Bhasma Aarti is considered the most divine and extraordinary ritual dedicated to Lord Shri Mahakaleshwar. Performed daily during the *Brahma Muhurta* (the auspicious pre-dawn hours) this *Aarti* is a focal point of faith for hundreds of thousands of devotees.
If you wish to obtain information regarding the official Bhasma Aarti booking Darshan rules entry procedures and the latest guidelines for the Shri Mahakaleshwar Temple please click the button below.
उज्जैन,
Madhya Pradesh,
India
खुलने का समय : 04:00 AM - 08:00 PM
5.0/5 (1K+ ratings)
उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर पूरे विश्व में अकेला ऐसा मंदिर है जिसे मंगल ग्रह (Mars) की जन्मभूमि माना जाता है। मत्स्य पुराण के अनुसार, यहाँ भगवान शिव के स्वरूप 'मंगलनाथ' की पूजा की जाती है। यह मंदिर ज्योतिषीय और खगोलीय (Astronomical) दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राचीन काल में यहाँ से मंगल ग्रह की गति की गणना की जाती थी।
इस मंदिर से भक्तों को मुख्य रूप से कुंडली के "मंगल दोष" (Manglik Dosha) के निवारण की अपेक्षा होती है। मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में आ रही वैवाहिक अड़चनें, भूमि विवाद, ऋण संकट और उग्र स्वभाव जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। यह मंदिर आध्यात्मिक शांति और ज्योतिषीय समाधान का एक बड़ा केंद्र है।
दर्शन के लिए सर्वोत्तम दिन: यदि आप केवल सामान्य दर्शन करना चाहते हैं, तो बुधवार से सोमवार के बीच आएं। मंगलवार को अत्यधिक भीड़ होती है।
पूजा की पूर्व तैयारी: यदि आप 'भात पूजा' करवाना चाहते हैं, तो मंदिर के आधिकारिक काउंटर या अधिकृत पुजारियों से पहले ही संपर्क कर लें।
ठगी से बचें: पूजा की रसीद हमेशा मंदिर प्रशासन के अधिकृत काउंटर से ही कटवाएं।
पौराणिक कथा: कथाओं के अनुसार, अंधकासुर नामक राक्षस और भगवान शिव के युद्ध के दौरान शिवजी के पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी, जिससे तीव्र लाल आभा वाले बालक का जन्म हुआ। यही बालक 'मंगल' कहलाए। इसी स्थान पर शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे मंगलनाथ कहा गया।
भौगोलिक महत्व: यह स्थान पृथ्वी का केंद्र (नाभि) भी माना जाता है। यहाँ से कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है।
मंदिर ज्ञात
Timings
प्रवेश शुल्क
Tips and restrictions
सुविधाएँ
समय की आवश्यकता
प्राचीन काल में यह स्थान भारतीय खगोल विज्ञान (Astronomy) का मुख्य केंद्र था। यहाँ बैठकर प्राचीन गणितज्ञों और खगोलविदों ने मंगल ग्रह की गति, उसकी दूरी और स्थिति की सटीक गणना की थी।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस स्थान की चुंबकीय शक्तियां विशेष प्रभाव रखती हैं।
भात पूजा : यह यहाँ की सबसे प्रमुख सेवा है। इसमें शिवलिंग पर पके हुए चावल (भात), दही, घी और पंचामृत का लेप लगाया जाता है। मंगल ग्रह की प्रकृति उग्र (गर्म) मानी जाती है, इसलिए उन्हें शांत करने के लिए ठंडे भात की पूजा की जाती है।
अन्य सेवाएँ: नवग्रह शांति पूजा, कालसर्प दोष निवारण, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और दैनिक अन्नक्षेत्र सेवा।
मंगला आरती (सुबह): भोर में 04:00 बजे से 04:30 बजे तक।
शाम की आरती: शाम 07:30 बजे से 08:00 बजे तक। (विशेष पर्वों जैसे अंगारक चतुर्थी और मकर संक्रांति पर आरती का समय बदला जा सकता है।)
सांदीपनि आश्रम (दूरी: ~1 किमी): जहाँ भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा पाई थी।
काल भैरव मंदिर (दूरी: ~2 किमी): जहाँ भगवान भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (दूरी: ~5.5 किमी): उज्जैन का मुख्य ज्योतिर्लिंग मंदिर।
सिद्धवट (दूरी: ~1.5 किमी): क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित पवित्र वटवृक्ष, जहाँ पितृ तर्पण किया जाता है।
सात्विक भोजन / अन्नक्षेत्र: मंदिर परिसर के पास भक्तों के लिए सात्विक भोजन उपलब्ध रहता है। दोपहर में यहाँ प्रसाद स्वरूप भोजन (दाल, चावल, सब्जी, रोटी) मिलता है।
स्थानीय व्यंजन: मंदिर के बाहर उज्जैन का प्रसिद्ध पोहा-जलेबी, साबूदाना खिचड़ी, मालपुआ और रबड़ी चाट आसानी से मिल जाती है।
प्रसाद: भगवान मंगलनाथ को बेसन के लड्डू, पेड़े और सूखे मेवे का भोग लगाया जाता है।
Jyoti Raikwar
tessss
vijay satish
You need to Sign in to view this feature
This address will be removed from this list