मंगलनाथ मंदिर
उज्जैन, Madhya Pradesh, India
Booking Date

खुलने का समय : 04:00 AM - 08:00 PM

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संक्षिप्त विवरण  

उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर पूरे विश्व में अकेला ऐसा मंदिर है जिसे मंगल ग्रह (Mars) की जन्मभूमि माना जाता है। मत्स्य पुराण के अनुसार, यहाँ भगवान शिव के स्वरूप 'मंगलनाथ' की पूजा की जाती है। यह मंदिर ज्योतिषीय और खगोलीय (Astronomical) दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्राचीन काल में यहाँ से मंगल ग्रह की गति की गणना की जाती थी।

विवरण की अपेक्षा 

इस मंदिर से भक्तों को मुख्य रूप से कुंडली के "मंगल दोष" (Manglik Dosha) के निवारण की अपेक्षा होती है। मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में आ रही वैवाहिक अड़चनें, भूमि विवाद, ऋण संकट और उग्र स्वभाव जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। यह मंदिर आध्यात्मिक शांति और ज्योतिषीय समाधान का एक बड़ा केंद्र है।

टिप्स विवरण 

  • दर्शन के लिए सर्वोत्तम दिन: यदि आप केवल सामान्य दर्शन करना चाहते हैं, तो बुधवार से सोमवार के बीच आएं। मंगलवार को अत्यधिक भीड़ होती है।

  • पूजा की पूर्व तैयारी: यदि आप 'भात पूजा' करवाना चाहते हैं, तो मंदिर के आधिकारिक काउंटर या अधिकृत पुजारियों से पहले ही संपर्क कर लें।

  • ठगी से बचें: पूजा की रसीद हमेशा मंदिर प्रशासन के अधिकृत काउंटर से ही कटवाएं।

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मंदिर का विवरण एवं इतिहास  

  • पौराणिक कथा: कथाओं के अनुसार, अंधकासुर नामक राक्षस और भगवान शिव के युद्ध के दौरान शिवजी के पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी, जिससे तीव्र लाल आभा वाले बालक का जन्म हुआ। यही बालक 'मंगल' कहलाए। इसी स्थान पर शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे मंगलनाथ कहा गया।

  • भौगोलिक महत्व: यह स्थान पृथ्वी का केंद्र (नाभि) भी माना जाता है। यहाँ से कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है।

मंदिर ज्ञात
स्थान: मंगलनाथ मार्ग, क्षिप्रा नदी के तट पर, उज्जैन, मध्य प्रदेश। कैसे पहुँचें: उज्जैन रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से मंदिर की दूरी लगभग 6 किमी है। आप स्टेशन से ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा या टैक्सी के माध्यम से आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। निकटतम हवाई अड्डा इंदौर (देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट) है, जो लगभग 60 किमी दूर है।

Timings
Open : 04:00 AM Close : 08:00 PM

प्रवेश शुल्क
General Darshan: Absolutely Free.

Tips and restrictions
फोटोग्राफी प्रतिबंधित: मंदिर के मुख्य गर्भगृह के अंदर कैमरा या मोबाइल से फोटो/वीडियो खींचना सख्त मना है। पोशाक संहिता (Dress Code): हालाँकि कोई कड़ा नियम नहीं है, लेकिन भक्तों को शालीन और पारंपरिक कपड़े (जैसे पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा/धोती और महिलाओं के लिए साड़ी/सूट) पहनने की सलाह दी जाती है। दलालों से सावधान: पूजा के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगने वाले अनधिकृत लोगों से बचें।

सुविधाएँ
जूता स्टैंड और क्लॉक रूम: सामान और जूते सुरक्षित रखने के लिए निःशुल्क/सस्ते काउंटर। बैठने और छांव की व्यवस्था: लंबी कतारों के लिए शेड और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने की कुर्सियां। पेयजल और शौचालय: स्वच्छ पीने का पानी और सुलभ शौचालय परिसर के भीतर उपलब्ध हैं। पार्किंग: वाहनों के लिए मंदिर के बाहर पर्याप्त सशुल्क पार्किंग स्पेस है।

समय की आवश्यकता
On Weekdays (Wed-Mon): 30 minutes to 1 hour. On Tuesdays & Festivals: 2 to 4 hours due to heavy planetary-ritual rush.

अधिक जानकारी  

प्राचीन काल में यह स्थान भारतीय खगोल विज्ञान (Astronomy) का मुख्य केंद्र था। यहाँ बैठकर प्राचीन गणितज्ञों और खगोलविदों ने मंगल ग्रह की गति, उसकी दूरी और स्थिति की सटीक गणना की थी।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस स्थान की चुंबकीय शक्तियां विशेष प्रभाव रखती हैं।

मंदिर सेवाएँ  

  • भात पूजा : यह यहाँ की सबसे प्रमुख सेवा है। इसमें शिवलिंग पर पके हुए चावल (भात), दही, घी और पंचामृत का लेप लगाया जाता है। मंगल ग्रह की प्रकृति उग्र (गर्म) मानी जाती है, इसलिए उन्हें शांत करने के लिए ठंडे भात की पूजा की जाती है।

  • अन्य सेवाएँ: नवग्रह शांति पूजा, कालसर्प दोष निवारण, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और दैनिक अन्नक्षेत्र सेवा।

मंदिर की आरती  

  • मंगला आरती (सुबह): भोर में 04:00 बजे से 04:30 बजे तक।

  • शाम की आरती: शाम 07:30 बजे से 08:00 बजे तक। (विशेष पर्वों जैसे अंगारक चतुर्थी और मकर संक्रांति पर आरती का समय बदला जा सकता है।)

. पर्यटक स्थल  

  • सांदीपनि आश्रम (दूरी: ~1 किमी): जहाँ भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा पाई थी।

  • काल भैरव मंदिर (दूरी: ~2 किमी): जहाँ भगवान भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है।

  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (दूरी: ~5.5 किमी): उज्जैन का मुख्य ज्योतिर्लिंग मंदिर।

  • सिद्धवट (दूरी: ~1.5 किमी): क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित पवित्र वटवृक्ष, जहाँ पितृ तर्पण किया जाता है।

मंदिर का स्थानीय भोजन   

  • सात्विक भोजन / अन्नक्षेत्र: मंदिर परिसर के पास भक्तों के लिए सात्विक भोजन उपलब्ध रहता है। दोपहर में यहाँ प्रसाद स्वरूप भोजन (दाल, चावल, सब्जी, रोटी) मिलता है।

  • स्थानीय व्यंजन: मंदिर के बाहर उज्जैन का प्रसिद्ध पोहा-जलेबी, साबूदाना खिचड़ी, मालपुआ और रबड़ी चाट आसानी से मिल जाती है।

  • प्रसाद: भगवान मंगलनाथ को बेसन के लड्डू, पेड़े और सूखे मेवे का भोग लगाया जाता है।

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