पितृ दोष शांति पूजा शिप्रा घाट उज्जैन
शिप्रा तट पिंडदान और तर्पण पूजा उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी के घाटों पर किया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है। यह पूजा पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए समर्पित होती है। श्राद्ध पक्ष, अमावस्या या विशेष तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
पूजा का महत्व
- पितरों को मोक्ष और शांति की प्राप्ति होती है।
- पितृ दोष और पूर्वजों के दुष्प्रभाव दूर होते हैं।
- परिवार को मिलता है धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद।
पूजा की मुख्य विधि
- संकल्प – श्रद्धालु संकल्प लेकर पूजा प्रारंभ करता है।
- पिंडदान – चावल, जौ और तिल से बने पिंड पितरों को अर्पित किए जाते हैं।
- तर्पण – तिल मिश्रित जल से पितरों को तृप्त किया जाता है।
- हवन एवं मंत्रोच्चार – वैदिक मंत्रों से शुद्धि और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
- आशीर्वाद और समापन – पूजा के अंत में परिवार को पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
शिप्रा तट पर विशेषता
- शिप्रा नदी को अत्यंत पवित्र माना गया है।
- यहाँ किया गया पिंडदान और तर्पण दस गुना पुण्यफल प्रदान करता है।
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के निकट होने से इसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी प्रबल हो जाता है।
रामघाट, उज्जैन