नवरात्रि विशेष दुर्गा सप्तमी पाठ
नवरात्रि की सप्तमी तिथि (महासप्तमी) को देवी के सबसे संहारक और कल्याणकारी रूप 'मां कालरात्रि' की पूजा की जाती है। इस विशेष दिन पर महाकाल की पावन नगरी में दुर्गा सप्तशती के विशिष्ट अध्यायों का पाठ और तांत्रिक व वैदिक विधि से अर्चन किया जाता है। यह पाठ साधक के जीवन से घोर अंधकार, शत्रुओं के षड्यंत्र और नकारात्मक शक्तियों को जड़ से मिटाने के लिए अचूक माना गया है। उज्जैन के सिद्ध आचार्यों द्वारा यह अनुष्ठान वैदिक नियमों के साथ संपन्न किया जाता है।
पूजा के उद्देश्य
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मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप को प्रसन्न कर अभय (भयहीनता) का वरदान प्राप्त करना।
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जीवन में अचानक आने वाले संकटों, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु के योग को टालना।
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जातक के ऊपर से किसी भी प्रकार के ऊपरी प्रभाव, नजर दोष या तंत्र-मंत्र की बाधा को समाप्त करना।
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मानसिक अशांति को दूर कर एकाग्रता, साहस और आत्मबल में वृद्धि करना।
पूजा के प्रभाव
दुर्गा सप्तमी पाठ का प्रभाव अत्यंत तीव्र होता है। इस पाठ के पूरा होते ही साधक को मानसिक रूप से हल्कापन और असीम सुरक्षा का अनुभव होता है। घर-परिवार में चल रहे पुराने विवाद, क्लेश और कोर्ट-कचहरी की परेशानियां मां की कृपा से सुलझने लगती हैं। नकारात्मक ऊर्जा का शमन होकर व्यापार और नौकरी के बंद रास्ते खुल जाते हैं
निष्कर्ष
शक्तिपीठ मां हरसिद्धि के सानिध्य में दुर्गा सप्तमी पाठ करवाना भाग्य के बंद तालों को खोलने जैसा है। यदि आप शत्रुओं से घिरे हैं, मानसिक तनाव से परेशान हैं या जीवन में सफलता पाना चाहते हैं, तो महाकाल.कॉम के माध्यम से इस विशेष पूजा का हिस्सा बनकर अपने जीवन को धन्य बनाएं।
शक्तिपीठ मां हरसिद्धि मंदिर परिसर एवं महाकाल क्षेत्र, उज्जैन, मध्य प्रदेश।