विवरण
जून और जुलाई के इस महीने में स्कूल खुल रहे हैं। जहाँ आम बच्चे नए स्कूल बैग और किताबों के साथ उत्साह से स्कूल जाने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं विभिन्न आश्रमों और अनाथालयों में रहने वाले मासूम बच्चों की आँखें आस लगाए बैठी हैं। वे राह देख रहे हैं उन्हें नई किताबें, रंग-बिरंगे बैग, चमचमाती पानी की बोतलें और टिफिन देगा। यह अभियान "शिक्षा सशक्तिकरण" इन्हीं आश्रम के बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने और उनकी इस 'आस' को 'विश्वास' में बदलने की एक छोटी सी कोशिश है।
महत्व
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आश्रम के बच्चों को संबल:- माता-पिता के साये से दूर आश्रम में रह रहे इन बच्चों को जब नई चीज़ें मिलती हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि समाज में उनका भी कोई अपना है जो उनकी परवाह करता है।
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पढ़ाई के प्रति रुचि जगाना :- नए बैग, टिफिन और किताबों का आकर्षण बच्चों के मन में स्कूल जाने और पढ़ने का एक नया उत्साह पैदा करता है।
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समानता का अहसास:- जब ये बच्चे भी दूसरे बच्चों की तरह अच्छी स्टेशनरी और बैग लेकर स्कूल जाएंगे, तो उनके मन से हीनभावना खत्म होगी और वे खुद को समाज का हिस्सा मानेंगे।
लाभ
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बच्चों के लिए:- उन्हें बिना किसी कमी के अपनी पढ़ाई जारी रखने का हौसला मिलता है और वे स्कूल जाने से कतराते नहीं हैं।
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आश्रम/संस्थाओं के लिए:- आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों में चलने वाले आश्रमों पर से बच्चों की पढ़ाई के खर्च का बोझ कम होता है।
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दाताओं (Donors) के लिए:- एक ऐसे बच्चे की मदद करने का सौभाग्य मिलता है जिसका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। यह आत्मिक शांति और असीम आनंद देता है।
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नया स्कूल बैग = ₹ 250
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नए पाठ्यपुस्तकें और कॉपियां = ₹ 300
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पानी की बोतल और टिफिन बॉक्स = ₹ 150
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स्टेशनरी किट - पेंसिल, रबर, पेन = ₹ 50
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एक आश्रम के बच्चे की पूरी किट = ₹ 750